Monday, November 5, 2012

My Adaptation of "What a Wonderful World"

When I hold your hand, We walk or we stand
World looks bright, you are my love my wife
And I say with smile, what a wonderful life

When I see you smile, I lose the world for a while
Watching your eyes, with a happy surprise
And I say with love, what a wonderful life

When we fight we cry, Patch up doesn't takes a try
We laugh at a view, shows our love is true
And I say with moist eyes, what a wonderful life

When you hug me tight, I feel its my right
You are my peace, your are my fire
And I say with proud, what a wonderful life

When we face the heat, we take like a treat
Whether happiness or turmoil, we go in with a smile
And I feel deep in heart, what a wonderful life

When you come, life rhymes
When you go, I wait for next times
World feels they can crush, I think of you and blush
And I know you are here, what a wonderful life

Monday, August 6, 2012

Going away is not a trend, are we going towards an end

Going away is not a trend, are we going towards an end
We were so happy, life looked to bright
Smiles were innocent & hearts were light
Why it slipped off like sand from hand
Are we really same or going towards end


You were so generous & showed me the what's right
I trusted you and we never had a fight
Whatever you said was a thing to execute
No matter what it is but I never gave excuse
Today when I think for you, am I not even a friend
you were too genuine & thinking for me like I pretended
Is it really what u were or its really towards an end

What I always wanted, was a smile on your face
Wanted sorrows to go far so that life can never trace
Should I be jealous of you & have issues with what you wanted
I always prayed for you & wished all your desires should be granted
You thought that for me, this thought made me frightened
I don't know what it is, are we going towards an end

We thought same thing, we said same lines
We were so mixed that difference was not even signs
You slapped me hard when you said I don't understand
I thought I am engraved but it seems its an end

You should be happy with me or without me
You should prosper like a grand old tree
You should always smile as we walked hand in hand
Every end is a beginning so its only my end

Its only my end

Its only my end

Friday, April 27, 2012

मुझे आज़ाद करो, जुदा करो अपनी पनाहों से ...........

मुझे आज़ाद करो, खुद की यादों से गुनाहों से   
मुझे आज़ाद करो, अपनी साँसो से और आँहो से 
मुझे आज़ाद करो, कुछ तो खुल के जी लू मैं ज़रा 
मुझे आज़ाद करो, जुदा करो अपनी पनाहों से 

मेरी हर बात तुझसे है, सारे जज़्बात तुझसे है 
मेरी हस्ती, मेरा वजूद , मेरा अहसास  तुझसे से है 
जो तू नहीं तो मैं हूँ क्या, चला जाऊंगा  राहो से 
मुझे आज़ाद करो, जुदा करो अपनी पनाहों से 

मैं तेरा कुछ भी नहीं हूँ, मुझे इतना कहा  तुने 
न  कभी था, न बनूँगा, ज़ख्म ये भी सहा मैंने 
जब यही हाल  तेरा है तो क्यों दर्द मेरी आहों से 
मुझे आज़ाद करो, जुदा करो अपनी पनाहों से 

Saturday, February 4, 2012

तुझसे मिलने को बेताब हूँ मैं.....

तुझसे मिलने को बेताब हूँ मैं, सोचा खुद को मैं पाउँगा 
पर ज़रा सा भी अहसास न था, मिल के और भी खो जाऊंगा

दो दिन थे वो या दो पल थे, बस आँख खुली और हवा हुए 
यादें रह गयी खुशबू की तरह, मिलने के गुल तो फ़ना हुए 

जो शुरू हुआ थे बस यु ही, वो रिश्ता आज रूहानी है 
तू संग मेरे अहसान तेरा, तू सच में मेरी कहानी  है 

तुझको देखा खुदको पाया, ये बात नहीं सच्चाई है 
माँ कुछ कम थी किस्मत में मेरी, शायद तू इसीलिए आई है 

तेरी ये हँसी मुस्कान मेरी, तेरा होना है घनी छाया
मेरा सपना है तेरा सपना, तेरे बिन मैं मैं न रह पाया 

कल मैं न रहू जो संग तेरे, तू अपनी हँसी को मत खोना 
आखिर ये हँसी ही कहती है, कितना सच है मेरा होना 

सोचा था मैंने एक दिन, मैं तो हवा हूँ बह जाऊंगा 
पर किसको था अहसास ये की तुझसे मिला और जड़ हो जाऊंगा 

तुझसे मिलने को बेताब हूँ मैं, सोचा खुद को मैं पाउँगा 
पर ज़रा सा भी अहसास न था, मिल के और भी खो जाऊंगा 

Saturday, January 21, 2012

क्यों आज बेवजह कोई हमसे नहीं मिलता ..............

क्यों  आज बेवजह कोई हमसे नहीं मिलता 
क्यों आज मेरे गुलदानो में सावन नहीं खिलता 
क्यों आज ये बारिश मेरी छत पर नहीं होती 
क्यों अब वो मेरे हाथों पर अपनी किस्मत नहीं बोती


कभी तो वो करे ऐसा ही मैं हैरान हो जाऊ
कभी तो वो फैला दे अपना आँचल और मैं सो जाऊ 
कभी तो वो अपनी हथेली से धुप मेरी रोके
कभी तो न जाये वो कभी, रह जाये मेरी होके 
क्यों अब फिजा यु सर्द है और कोई फूल नहीं खिलता 
क्यों आज बेवजह कोई हमसे नहीं मिलता 

शायद वो मेरा प्यार न था, मेरा ये वहम था

शायद वो मेरा प्यार न था, मेरा ये वहम था
शायद है तू खुदा और मुझ पर तेरा ये करम था

अब ये तो कुछ अजीब है की न सोया मैं रात भर
देखा न तुझसे बात की पर रोया मैं रात भर
दिन भर मैं तुझको भूला और तुजमे खोया मैं रात भर
माला जो टूटी आस की, उसको पिरोया मैं रात भर
पर टीस मेरे दिल की शायद मेरा ही ज़ख्म था
शायद वो मेरा प्यार न था, मेरा ये वहम था

कल तक मेरी आवाज़ तेरे दिन की अज़ान थी
रहती थी मेरे दिल अपने घर में मेहमान थी
मेरा वजूद तुझसे था, तू मेरी पहचान थी
कैसे था ये हुआ, खुद खुदाई हैरान थी
ये हो गया, होता गया, बस ये ही अहम् था
शायद वो मेरा प्यार न था, मेरा ये वहम था

जाने दिया तुझे लगा की लौट आएगी
अब तक जो रही मेरी अब क्यों तू जाएगी 
कहने दो कुछ उन्हें, न उनकी बातों में आएगी
दिल को थी दिल से आस की न मुझको भूलाएगी
गयी तू और दिल टूट गया, जैसे तू मरहम था
शायद वो मेरा प्यार न था, मेरा ये वहम था

गर प्यार होता ये क्यों न मुझको है करार
गर प्यार ही था ये तो क्यों न आई तू एक बार
गर प्यार ही था ये तो न कोई ख़त न एक ख्याल
ये प्यार नहीं था ये थी खुशफहमी बेमिसाल
तेरा नसीब खूब था, बस मेरा ही नरम था 
शायद वो मेरा प्यार न था, मेरा ये वहम था  
शायद वो मेरा प्यार न था, मेरा ये वहम था ........

कभी तो लौट कर आ, लौट कर न आने वाले

कभी तो लौट कर आ, लौट कर न आने वाले 
कभी तो लौट कर आ, मुझे हर बार मनाने वाले
कभी तो लौट कर आ, खुद हार के मुझे जिताने वाले 
कभी तो लौट कर आ, मेरी पलकों को भीगाने वाले


तेरे इंतज़ार में, बस तेरे आने के ऐतबार में हूँ 
तुझे पता भी नहीं की में तेरे इख्तियार में हूँ 
मुझे बना के अपना आदी, अब मुझको सताने वाले 
कभी तो लौट कर आ, लौट कर न आने वाले 


कहा नहीं कभी तुने की तू लौट आएगी  
मगर ऐसा भी कब कहा की नहीं आएगी 
जवाब होंटो से नहीं, नजरो से बताने वाले 
कभी तो लौट कर आ, लौट कर न आने वाले 


मैं कैसे मान लू तेरी की तू नहीं मेरी 
मैं कैसे मान लू की आ गयी हम में दूरी 
मैंने तो ये सुना नहीं, हर बात मुझे सुनाने वाले 
कभी तो लौट कर आ, लौट कर न आने वाले 


जो जा रहा था  अगर तू, मुझो तो बताया होता 
कोई कतरा कहीं गम का, कोई आंसू तो गिराया होता 
मेरी ख़ुशी के लिए, अपने आंसू छुपाने वाले 
कभी तो लौट कर आ, लौट कर न आने वाले 


मुझे यकीन नहीं अब तक, तू अब करीब नहीं 
लगा नहीं सूना कभी, कभी अजीब नहीं 
मेरे जिगर से आज भी अपनी बातें मुझे सुनाने वाले 
कभी तो लौट कर आ, लौट कर न आने वाले 


कभी तो लौट कर आ, लौट कर न आने वाले ..........