अपना रिश्ता कितना अलग है
कितना जुदा है बाकी सब से
अक्सर रिश्तो के नाम है होते
इसमें तुम्हारा नाम है रिश्ता
जब जो चाहा इसको पुकारा
जैसे चाहे बना लिया
कभी दोस्ती, कभी आत्मा
कभी लड़ाई का नाम दिया
सबसे अलग सी बात है इसमें, कोई बंदिश इसमें नहीं है
जहाँ गलत था सही किया और जहाँ सही है, वहां सही है
इस रिश्ते में दूरी बहुत थी पर कोई गाँठ कभी नहीं थी
इनता लड़के भी फिर से मिले हम, ज़रूर कोई तो बात रही थी
जिसने जो भी माँगा उसने वो भी पाया इसमें
एक माँ थी और एक बेटा, भाई भाई बनाया इसने
जितना हो सका दोनों ने दिया, सोचा नहीं की क्यों देना है
आखिर कुछ तो बात है इसमें, इसका दुःख भी हँस के सहना है
आज तो तुमने कुछ ऐसा मागा जिसकी मुझे उम्मीद नहीं थी
सोचा था की होता हु में सही पर इस बार तो सच में तुम ही सही थी
तुमने जो अगर जान मांगी होती तो भी ये बात समझ लेता
तुमने जब कहा की जाना है, कैसे में हाथ पकड़ लेता
शायद इस रिश्ते का नाम ना होना ही इसकी कमजोरी है
पर क्या प्यार ही बहुत नहीं, क्यों बीच में आग ज़रोरी है
तुम जा रहे हो आज तो में सिर्फ दुआ ही करता हु
खुश रहो सदा, ना गम हो कभी बस ये ही दम भरता हु
ये आँखें नम पर लब पे हँसी है क्यूँकी आपको को आंसू पसंद नहीं
आप जाओ और खुश रहो सदा, ये है शायद अब होगा सही
ऐसा नहीं की याद नहीं आएगी, या तू कभी भी दुखी रहेगी
होंटो पे रहेगी तेरे हँसी सदा और दिल में मेरे हमेशा दुआ रहेगी
Wednesday, October 13, 2010
Tuesday, October 12, 2010
कल जिसने कहा था अलविदा
जो जो सोचा सब वही हुआ, ये सच है या कोई सपना है
कल जिसने कहा था अलविदा, क्या अब तक भी वो अपना है
जब पूछा खुदा ना क्या दे दू, हमने साथ कहा की प्यार बना रहे
जब तक रहे तब तक साथ रहे जीवन में ये रस भरा रहे
जब आज ये रस है, प्यार भी है तो फिर तुमको क्यों जाना है
क्या सच मैं तुमको फिकर नहीं या मुझसे तुम्हे कुछ छुपाना है
अब तक तो हम साथ रहे पर क्या अब आगे जुदाई है
क्यों आँखें सुखी है तेरी जब मेरी आँख भर आई है
क्या सच में वो कोई सपना था जो आज अचानक टूट गया
ये रिश्ता कभी का खत्म हुआ, ये हाथ भी आज छूट गया
तुम कहते थे की मुझे भुला दोगे जब भी तुम चाहोगे
क्यों अब भी में विश्वास करू की एक दिन तुम लौट आओगे
लगता है ये कोई सपना है, अब कोई मुझे उठा भी दो
तुम पास नहीं पर साथ तो है ये फिर से मुझे बता तो दो
तुम जानते हो की बिना तुम्हारे मेरा कोई वजूद नहीं
अगर तुम हो तो में हु वरना में भी मौजूद नहीं
फिर क्यों तुमने ये खेल किया, क्यों की कोशिश यु जाने की
नाराज़ अगर जो से मुझसे, कोई नहीं दी मोहलत मनाने की
क्यों किया ये तुमने जिसे देख में सोचने पर मजबूर हुआ
क्या जिस्म की दुरी बहुत नहीं जो अब दिल में भी दूरी है
जब कभी मिलूँगा में तुमसे, क्या सच में ही मिल पाउँगा
क्या याद आएगा प्यार तुम्हे, या दुश्मन सा नज़र आऊंगा
मुझको अब भी विश्वास नहीं, मेरे लिए ये अब भी सपना है
कल जिसने कहा था अलविदा, क्यों अब तक भी वो अपना है
कल जिसने कहा था अलविदा, क्या अब तक भी वो अपना है
जब पूछा खुदा ना क्या दे दू, हमने साथ कहा की प्यार बना रहे
जब तक रहे तब तक साथ रहे जीवन में ये रस भरा रहे
जब आज ये रस है, प्यार भी है तो फिर तुमको क्यों जाना है
क्या सच मैं तुमको फिकर नहीं या मुझसे तुम्हे कुछ छुपाना है
अब तक तो हम साथ रहे पर क्या अब आगे जुदाई है
क्यों आँखें सुखी है तेरी जब मेरी आँख भर आई है
क्या सच में वो कोई सपना था जो आज अचानक टूट गया
ये रिश्ता कभी का खत्म हुआ, ये हाथ भी आज छूट गया
तुम कहते थे की मुझे भुला दोगे जब भी तुम चाहोगे
क्यों अब भी में विश्वास करू की एक दिन तुम लौट आओगे
लगता है ये कोई सपना है, अब कोई मुझे उठा भी दो
तुम पास नहीं पर साथ तो है ये फिर से मुझे बता तो दो
तुम जानते हो की बिना तुम्हारे मेरा कोई वजूद नहीं
अगर तुम हो तो में हु वरना में भी मौजूद नहीं
फिर क्यों तुमने ये खेल किया, क्यों की कोशिश यु जाने की
नाराज़ अगर जो से मुझसे, कोई नहीं दी मोहलत मनाने की
क्यों किया ये तुमने जिसे देख में सोचने पर मजबूर हुआ
क्या जिस्म की दुरी बहुत नहीं जो अब दिल में भी दूरी है
जब कभी मिलूँगा में तुमसे, क्या सच में ही मिल पाउँगा
क्या याद आएगा प्यार तुम्हे, या दुश्मन सा नज़र आऊंगा
मुझको अब भी विश्वास नहीं, मेरे लिए ये अब भी सपना है
कल जिसने कहा था अलविदा, क्यों अब तक भी वो अपना है
आँखों को बस इंतज़ार है
अक्सर मेरे सवाल का जवाब जानता हु मैं
पर फिर भी क्यों ना जाने उनसे पूछता हु मैं
क्या मालूम नहीं मुझको की कितना प्यार मुझसे है
क्यों फिर से उनसे सुनाने को बेताब रहता हु मैं
क्यों जब कहे वो तब ही ये बात नयी सी लगती है
नहीं हो वो करीब तो भी उनकी कमी ना खलती है
क्यों नहीं मैं भूल पता उसका वो खुमार
क्यों नहीं मान लेता की वो था भरम नहीं था प्यार
क्यों ये उसका नाम अपने से जोड़ने की प्यास है
क्यों ये नाम साथ में लेना ही मिठास है
क्यों ये लगता की नाम में मेरे है कुछ कमी
क्यों ये लगता है तू दूर जाके भी मेरी ही रही
क्यों मेरा अधिकार आज भी तुझ पर है बरक़रार
क्यों नज़र आता है तेरी आँखों में अब भी प्यार
क्यों नहीं भूल गया वो वक़्त वो तारीख
क्यों तू दूर है नहीं, है आज भी करीब
क्यों जो तुने कहा वो आज भी सच होता है
क्यों नहीं ये दिल तेरे बारे में सोच रोता है
क्यों नहीं में मान पाया तू मेरी नहीं रही
क्यों भला ये बात अब तक मुझसे नहीं कही
क्यों ये आज भी मुझको तेरा इंतज़ार है
क्यों मुझे भी आज तक तुझसे ही इतना प्यार है
इतने क्यों सुन कर तो अब तो दिल भी मेरा रो दिया
रोते रोते मुझसे बोला की क्या लगता है उसको खो दिया
इतने है सवाल क्यूँकी प्यार अब भी है बरक़रार
क्या वो कभी रोई नहीं करके तेरा यु इंतजार
आज तेरा वक़्त है, तू इंतज़ार करता रहे
पर ये याद रखना की लब पे सदा दुआ रहे
जब खुदा की नज़र में तेरी दुआ चढ़ जाएगी
रोक ना पायेगा उसे कोई, वो लौट आएगी
अब सवाल कोई ना था, बस दिल ही कुछ बेक़रार है
दुआ तो सदा चल रही, आँखों को बस इंतज़ार है
आँखों को बस इंतज़ार है
पर फिर भी क्यों ना जाने उनसे पूछता हु मैं
क्या मालूम नहीं मुझको की कितना प्यार मुझसे है
क्यों फिर से उनसे सुनाने को बेताब रहता हु मैं
क्यों जब कहे वो तब ही ये बात नयी सी लगती है
नहीं हो वो करीब तो भी उनकी कमी ना खलती है
क्यों नहीं मैं भूल पता उसका वो खुमार
क्यों नहीं मान लेता की वो था भरम नहीं था प्यार
क्यों ये उसका नाम अपने से जोड़ने की प्यास है
क्यों ये नाम साथ में लेना ही मिठास है
क्यों ये लगता की नाम में मेरे है कुछ कमी
क्यों ये लगता है तू दूर जाके भी मेरी ही रही
क्यों मेरा अधिकार आज भी तुझ पर है बरक़रार
क्यों नज़र आता है तेरी आँखों में अब भी प्यार
क्यों नहीं भूल गया वो वक़्त वो तारीख
क्यों तू दूर है नहीं, है आज भी करीब
क्यों जो तुने कहा वो आज भी सच होता है
क्यों नहीं ये दिल तेरे बारे में सोच रोता है
क्यों नहीं में मान पाया तू मेरी नहीं रही
क्यों भला ये बात अब तक मुझसे नहीं कही
क्यों ये आज भी मुझको तेरा इंतज़ार है
क्यों मुझे भी आज तक तुझसे ही इतना प्यार है
इतने क्यों सुन कर तो अब तो दिल भी मेरा रो दिया
रोते रोते मुझसे बोला की क्या लगता है उसको खो दिया
इतने है सवाल क्यूँकी प्यार अब भी है बरक़रार
क्या वो कभी रोई नहीं करके तेरा यु इंतजार
आज तेरा वक़्त है, तू इंतज़ार करता रहे
पर ये याद रखना की लब पे सदा दुआ रहे
जब खुदा की नज़र में तेरी दुआ चढ़ जाएगी
रोक ना पायेगा उसे कोई, वो लौट आएगी
अब सवाल कोई ना था, बस दिल ही कुछ बेक़रार है
दुआ तो सदा चल रही, आँखों को बस इंतज़ार है
आँखों को बस इंतज़ार है
Sunday, October 10, 2010
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो (My all time Favorite)
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
तुम गीत हो संगीत हो, जीवन के तुम ही मीत हो
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
तुम ज्ञान हो वरदान हो, जीवन का तुम अभिमान हो
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
तुमसे जुड़ा तुमसे बंधा जीवन का हर पर्याय है
तुम से शुरू तुम पर खत्म जीवन का हर अध्याये है
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
तुम कंठ हो, तुम वाणी हो, तुम आदि हो तुम अंत हो
जीवन सदा रहा सूना, जीवन में तुम बसंत हो
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
तुम मंदिर का शंख हो, तुम मस्जिद की अजान हो
तुम हो पारी जीवन में मेरे, भगवान का अहसान हो
तुम से जुड़ा हर सपना मेरा, तुम मेरी सुख की सांस हो
मैं सोचता रहा सदा की तुम ही प्रेम पे मेरा विश्वास हो
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
सब है भरम जीवन में बस एक तुम ही अखंड हो
मै हु बस एक हिम शिखर, तुम ही मेरा हिम खंड हो
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
तुमसे जुडी तुमसे लगी जीवन की हर एक आस है
तुम ना मिलो जब तक तब तक जीवन में प्यास है
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
तुम राग हो आलाप हो, मृदुंग की तुम थाप हो
मैं सोचता था की मुझे में मैं हु पर मुझे मैं तो बस आप हो
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
जब जब कहा तुमने मुझे की तुमको कितना प्रेम है
मैंने सुना चुप चाप पर आज तू क्यों मौन है
क्या सच में है ऐसा हुआ की तू समझ गया है आज
क्युकी में कभी ना कह सका मेरे लिए तुम कौन हो
शायद ये ऐसी बात है जिसमे ना कोई विकार है
शायद से सिर्फ विचार है जिसका ना कोई आकर है
शायद ये सिर्फ एक भाव है जिसने मुझे बाँध रखा है
शायद ये है कोई बंधन जो आज फिर तुम मौन हो
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
तुम गीत हो संगीत हो, जीवन के तुम ही मीत हो
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
तुम ज्ञान हो वरदान हो, जीवन का तुम अभिमान हो
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
तुमसे जुड़ा तुमसे बंधा जीवन का हर पर्याय है
तुम से शुरू तुम पर खत्म जीवन का हर अध्याये है
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
तुम कंठ हो, तुम वाणी हो, तुम आदि हो तुम अंत हो
जीवन सदा रहा सूना, जीवन में तुम बसंत हो
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
तुम मंदिर का शंख हो, तुम मस्जिद की अजान हो
तुम हो पारी जीवन में मेरे, भगवान का अहसान हो
तुम से जुड़ा हर सपना मेरा, तुम मेरी सुख की सांस हो
मैं सोचता रहा सदा की तुम ही प्रेम पे मेरा विश्वास हो
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
सब है भरम जीवन में बस एक तुम ही अखंड हो
मै हु बस एक हिम शिखर, तुम ही मेरा हिम खंड हो
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
तुमसे जुडी तुमसे लगी जीवन की हर एक आस है
तुम ना मिलो जब तक तब तक जीवन में प्यास है
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
तुम राग हो आलाप हो, मृदुंग की तुम थाप हो
मैं सोचता था की मुझे में मैं हु पर मुझे मैं तो बस आप हो
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
जब जब कहा तुमने मुझे की तुमको कितना प्रेम है
मैंने सुना चुप चाप पर आज तू क्यों मौन है
क्या सच में है ऐसा हुआ की तू समझ गया है आज
क्युकी में कभी ना कह सका मेरे लिए तुम कौन हो
शायद ये ऐसी बात है जिसमे ना कोई विकार है
शायद से सिर्फ विचार है जिसका ना कोई आकर है
शायद ये सिर्फ एक भाव है जिसने मुझे बाँध रखा है
शायद ये है कोई बंधन जो आज फिर तुम मौन हो
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
कैसे बताऊ मैं तुम्हे, मेरे लिए तुम कौन हो
Tuesday, October 5, 2010
सूखे फूल
मैंने कब कहा की मुझे ताज़ा फूल चाहिए
मेरे लिए तो मेरे सूखे फूल काफी है
जब मिले ख़ुशी तो तुमको सदा मिले
मेरे लिए तो जीवन के शूल काफी है
कभी लगा नहीं की तुजसे दूर हु में अब
कभी सोचा नहीं तुम से अब मिलूँगा कब
जब आज सोचा तो आँखें ज़रा सी सील गयी
मैंने कब माँगा था समुन्दर, जो नसीब से झील गयी
क्यों कहा नहीं तुम्हे वो सब जो में महसूस करता था
बताया क्यों नहीं कभी की तुम पे कितना मरता था
लगा सदा की तुम ये जानते होगे
मैं तुम्हे खुदा मन, तुम मुझे अपना तो मानते होगे
कभी लगा भी नहीं की तुम्हे बताना ज़रूरी है
कभी लगा नहीं की साथ रहना हमारी मजबूरी है
सोचता रहा की मेरा वक़्त आएगा
वो दिन होगा जब आसमान पे सिन्दूर छाएगा
पर लगा ही नहीं की ये तन्हाई का आगाज़ है
मेरा दिन कभी ना आएगा, मेरा दिन तो सिर्फ आज है
ऐसा नहीं की तुम नहीं थे या कुछ और हो गया
बस तुम आये जब मेरे तो शायद मैं तुममे ही खो गया
ऐसा नहीं दिल टूट गया, मुझे तो आज भी प्यार है
तुम्हे भी मुझ पर यकीन ,मुझे भी तेरा ऐतबार है
पर ये दिल कभी है काबू मैं, कभी बेक़रार होता है
भीड़ में ये हँसता है, तन्हाई में रोता है
तुम्हे मिले वो हर ख़ुशी जो हमने साथ सोची थी
तुम्हारी झोली में सुकून हो, में तो गम भी पी लूँगा
अगर मुझे तस्सली हो, की तुम हो आज भी सुखी
तो मेरा क्या मैं भी बस जी लूँगा
वैसे भी ताज़ा फूल मेरे लिए दुशवार है
तुम्हे मुबारक ताज़ा ये फूल, मुझे मेरे सूखे फूलों से प्यार है
मेरे लिए तो मेरे सूखे फूल काफी है
जब मिले ख़ुशी तो तुमको सदा मिले
मेरे लिए तो जीवन के शूल काफी है
कभी लगा नहीं की तुजसे दूर हु में अब
कभी सोचा नहीं तुम से अब मिलूँगा कब
जब आज सोचा तो आँखें ज़रा सी सील गयी
मैंने कब माँगा था समुन्दर, जो नसीब से झील गयी
क्यों कहा नहीं तुम्हे वो सब जो में महसूस करता था
बताया क्यों नहीं कभी की तुम पे कितना मरता था
लगा सदा की तुम ये जानते होगे
मैं तुम्हे खुदा मन, तुम मुझे अपना तो मानते होगे
कभी लगा भी नहीं की तुम्हे बताना ज़रूरी है
कभी लगा नहीं की साथ रहना हमारी मजबूरी है
सोचता रहा की मेरा वक़्त आएगा
वो दिन होगा जब आसमान पे सिन्दूर छाएगा
पर लगा ही नहीं की ये तन्हाई का आगाज़ है
मेरा दिन कभी ना आएगा, मेरा दिन तो सिर्फ आज है
ऐसा नहीं की तुम नहीं थे या कुछ और हो गया
बस तुम आये जब मेरे तो शायद मैं तुममे ही खो गया
ऐसा नहीं दिल टूट गया, मुझे तो आज भी प्यार है
तुम्हे भी मुझ पर यकीन ,मुझे भी तेरा ऐतबार है
पर ये दिल कभी है काबू मैं, कभी बेक़रार होता है
भीड़ में ये हँसता है, तन्हाई में रोता है
तुम्हे मिले वो हर ख़ुशी जो हमने साथ सोची थी
तुम्हारी झोली में सुकून हो, में तो गम भी पी लूँगा
अगर मुझे तस्सली हो, की तुम हो आज भी सुखी
तो मेरा क्या मैं भी बस जी लूँगा
वैसे भी ताज़ा फूल मेरे लिए दुशवार है
तुम्हे मुबारक ताज़ा ये फूल, मुझे मेरे सूखे फूलों से प्यार है
Friday, October 1, 2010
आँखें और दिल
एक दिन आँखों ने दिल से एक अजीब सवाल किया
बहुत सोचा पर दिल ने ना कोई जवाब दिया
आँखों ने पूछा की मुझे तो यार को देख कर ख़ुशी मिलती है
उसके चेहरे की हँसी देख कली खिलती है
पर तू तो बहुत ही अन्दर है और ना तेरे पास दृष्टि है
फिर तू क्यों बेचैन नहीं, तुझको कैसे संतुष्टि है
दिल ने सोचा सब कुछ कह दे पर सोचा ये तो आँखें है
कुछ कहा तो ये रो देगी, चुप रहा तो सवाल जारी रहेगा
सवाल तो मैं सह लूँगा पर आंसू ये जिस्म कैसे सहेगा
वैसे भी ये इन्सान है,इसकी आदत अनजानी है
जिसको ये अजनबी समझता है वो सदियों से जानी पहचानी है
वैसे भी तो प्यार को शब्दों में बताना नामुमकिन है
ये आँखें इसको क्या समझे, इनके पास कहाँ दिल है
ये सिर्फ देख कर उसको अपना कहती है की जो पास है
जानती नहीं की दिल को तो हर वक़्त उसका अहसास है
वो सामने हो तो ये खुश है, वो नहीं तो ये उदास है
क्या इसको नहीं समझ इतनी की दिल को उसकी आस है
पर ये इंसान है प्यार समझना इनके बस की बात नहीं
ये क्या जाने की प्यार के लिए कोई उम्र नहi, कोई जात नहीं
जब ये आँखें प्यार का अहसास पा के भीग जाती है
क्या सच में पता है इनको की रो कर भी क्यों सुख पाती है
जब जब ये कहती है की इनको प्यार समझ में आया
तब तब दिल हँस पड़ता है, की एक और को मैंने फसाया
ये प्यार सिर्फ अहसास है उसकी लिए कोई शब्द नहीं
प्यार में हर सही गलत और लगता है हर एक गलत सही
ये भी सच है की प्यार आँखों से नहीं दिल से होता है
तभी तो आँखें सुखी राहतi और दिल अक्सर ही रोता है
पर सच में रिश्ता आँखों का दील से एक अजब सी बात है
ये ऐसा है की जैसे आज इन्सान और भगवान की मुलाकात है
यार नहीं मेरे सामने जब जब आँखें ये कहती है
दिल हँस पड़ता है जोर से क्यूँकी तू इसी दिल में रहती है
तू पास नहीं पर साथ सदा है क्यूनी दिल का दिल से नाता है
पर आँखें नहीं समझेंगी इसे ये सोच के दिल चुप रह जता है
इसी लिए दिल ने आँखों का नहीं दिया जवाब
क्यूंकि आँखें देखती है दुनिया और दिल देख पाता है ख्वाब...
Wednesday, September 29, 2010
माँ
आज ये सोचा की क्या माँ की परिभाषा है
क्या सच में ये इंसान है या एक भरम है या कोई आशा है
माँ वो है जो जन्म की ही नहीं करम की भी साथी है
माँ वो है जो हर पल मेरा साथ निभाती है
माँ वो है जिसे मेरी गलती हो कर भी नज़र नहीं आती
माँ वो है जो किसी को भी मेरी शरारत नहीं बताती
माँ में तो बस शहद ही शहद है प्यार है और मिठास है
माँ में पाया मैंने दोस्त जिस पर मुझे अटल विश्वास है
माँ वो है जो मेरी ख़ुशी में पागल और गम में मेरे उदास है
माँ वो है जो देती मुझे आखिरी हिस्सा पानी का, जबकि उसे भी प्यास है
माँ के पास दो दिल है क्यूंकि उसने दिमाग की जगह भी दिल पाया है
ये सच है तभी उसे आज तक कोई मेरी कमी ना दिखा पाया है
माँ ने मेरी क्या नहीं सहा जब जब मैंने कुछ गलत किया
माँ ने मेरी क्या नहीं सुना जब जब मैंने गुस्से में कहा
क्या जवाब नहीं दे सकती वो, फिर क्यों वो चुप रह जाती है
अक्सर उसकी भीगी आँखें सब राज़ ये मुझे बताती है
क्या सच में ये बस प्यार है या में हूँ उनका कुछ ख़ास
दूर हो गयी गलत फहमी जब देखा सबके लिए प्यार भरा अहसास
शयद क्यूंकि सिर्फ दिल है तो बुरा सोच वो नहीं पाती
जब जब देखती मुझे परेशान वो चुपके से नीर बहाती
क्या में सच में दे सकता हूँ माँ की पूरी परिभाषा
क्युकी मुझे लगता है की मैं कहता हु उनकी ही भाषा
मैं बता भी नहीं सकता की कितनी वो मेरे लिए कितनी खास है
सच में इन्सान नहीं एक रिश्ता एक अहसास है
मैं हार गया पर माँ को शब्दों में नहीं बांध पाया
जब जब सोचा अब समझ गया माँ का एक और रूप नज़र आया
जब देखा उसने में रोया हूँ ,उसने आंसू मेरे साफ़ किये
जो भी गुनाह मैंने किये सब हँसके उसने माफ़ किये
माँ शायद मेरी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा आधार है
उसके होते दुनिया साकार वरना तो बिलकुल बेकार है
जब में किसी को प्यार से माँ कहता हूँ तो ये सम्मान है
क्यूंकि जानता हूँ मैं की माँ होना नहीं आसन है....
क्या सच में ये इंसान है या एक भरम है या कोई आशा है
माँ वो है जो जन्म की ही नहीं करम की भी साथी है
माँ वो है जो हर पल मेरा साथ निभाती है
माँ वो है जिसे मेरी गलती हो कर भी नज़र नहीं आती
माँ वो है जो किसी को भी मेरी शरारत नहीं बताती
माँ में तो बस शहद ही शहद है प्यार है और मिठास है
माँ में पाया मैंने दोस्त जिस पर मुझे अटल विश्वास है
माँ वो है जो मेरी ख़ुशी में पागल और गम में मेरे उदास है
माँ वो है जो देती मुझे आखिरी हिस्सा पानी का, जबकि उसे भी प्यास है
माँ के पास दो दिल है क्यूंकि उसने दिमाग की जगह भी दिल पाया है
ये सच है तभी उसे आज तक कोई मेरी कमी ना दिखा पाया है
माँ ने मेरी क्या नहीं सहा जब जब मैंने कुछ गलत किया
माँ ने मेरी क्या नहीं सुना जब जब मैंने गुस्से में कहा
क्या जवाब नहीं दे सकती वो, फिर क्यों वो चुप रह जाती है
अक्सर उसकी भीगी आँखें सब राज़ ये मुझे बताती है
क्या सच में ये बस प्यार है या में हूँ उनका कुछ ख़ास
दूर हो गयी गलत फहमी जब देखा सबके लिए प्यार भरा अहसास
शयद क्यूंकि सिर्फ दिल है तो बुरा सोच वो नहीं पाती
जब जब देखती मुझे परेशान वो चुपके से नीर बहाती
क्या में सच में दे सकता हूँ माँ की पूरी परिभाषा
क्युकी मुझे लगता है की मैं कहता हु उनकी ही भाषा
मैं बता भी नहीं सकता की कितनी वो मेरे लिए कितनी खास है
सच में इन्सान नहीं एक रिश्ता एक अहसास है
मैं हार गया पर माँ को शब्दों में नहीं बांध पाया
जब जब सोचा अब समझ गया माँ का एक और रूप नज़र आया
जब देखा उसने में रोया हूँ ,उसने आंसू मेरे साफ़ किये
जो भी गुनाह मैंने किये सब हँसके उसने माफ़ किये
माँ शायद मेरी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा आधार है
उसके होते दुनिया साकार वरना तो बिलकुल बेकार है
जब में किसी को प्यार से माँ कहता हूँ तो ये सम्मान है
क्यूंकि जानता हूँ मैं की माँ होना नहीं आसन है....
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